हम जब मोबाइल फ़ोन को ख़रीदते हैं तो उसके लुक, फ़ीचर्स आदि पर ध्यान देते हैं। लेकिन कभी यह जानने की कोशिश नहीं करते हैं कि वह हमारे स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव डालेगा? उससे निकलने वाला रेडियेशन कितना ख़तरनाक है? इस विषय में आप सोचे न सोचे भारत सरकार और मोबाइल कम्पनियाँ ज़रूर सोचती हैं। इसलिए वह सार लिमिट (SAR Limit) से कम रेडिएशन वाले फ़ोन डिज़ाइन करते हैं।

भारत में मोबाइल डिवाइसेज़ (मोबाइल, स्मार्टफ़ोन, फैबलेट, टैब आदि) को भारत सरकार द्वारा तय रेडियो फ्रिक्वेंसी एनर्जी की सीमा (एक्सपोज़र लिमिट; Exposure Limit) के अनुसार डिज़ाइन किया जाता है। किसी भी मोबाइल डिवाइस में तय सीमा से अधिक रेडियो फ्रिक्वेंसी एनर्जी नहीं निकलनी चाहिए।

SAR limit cell phone radiation

एक्सपोज़र लिमिट को मापने का मात्रक विशिष्ट अवशोषण दर (स्पेसिफ़िक एब्ज़ोर्प्शन रेट; Specific Absorption Rate) या सार (SAR) कहलाता है।

The exposure limits use a unit of measurement known as the Specific Absorption Rate, or SAR. The SAR limit for mobile devices is 1.6 W/Kg.

भारत में मोबाइल डिवाइसेज़ के लिए निश्चित सार लिमिट (SAR Limit) 1.6 वाट/किलोग्राम है।

इसलिए यदि आपके फ़ोन की सार लिमिट तय सीमा से अधिक है तो अपना फ़ोन तुरंत बदल दें और नया फ़ोन ख़रीदते समय कम से कम सार लिमिट वाला फ़ोन ही ख़रीदें। क्योंकि अधिक सार लिमिट वाले फ़ोन आपके मस्तिष्क और शरीर की कोशिकाओं पर बहुत बुरा प्रभाव डालते हैं।

How to know SAR Limit for mobile phone?

मोबाइल फ़ोन की सार लिमिट पता करना

किसी मोबाइल की सार लिमिट पता करने के लिए आगे दिया कोड डायल करें।
*#07#

आशा करता हूँ कि आप मोबाइल फ़ोन का प्रयोग करने के साथ-साथ अपने स्वास्थ्य का भी पूरा ध्यान रखेंगे।


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ईमेल अकाउंट की हैकिंग या उसकी जासूसी करना अपराध की श्रेणी में आता है। बहुत से लोग अलग-अलग कारणों से दूसरों की प्राइवेट ईमेल पढ़ने में रुचि रखते हैं। इसके लिए वे दूसरों का अकाउंट हैक कर लेते हैं या फिर उसके लिए कोशिश करते रहते हैं। अगर आपका अकाउंट हैक हो गया है तो आपको कैसे पता चलेगा? आप सोचते हैं कि लोग अकाउंट हैक करने के बाद पासवर्ड बदल लेते हैं और जब आप लॉगिन नहीं कर पा रहे हैं तो ही आपका ईमेल अकाउंट हैक हुआ है। लेकिन ऐसा नहीं हैं कोई आपका अकाउंट हैक करके चुपके-चुपके आपकी प्राइवेट ईमेल पढ़ सकता है। जो कि आप कभी भी किसी से शेअर नहीं करना चाहेंगे। तो कैसे पता चले कि कोई दूसरा आपके अकाउंट में लॉगिन करने आपकी प्राइवेसी का उल्लंघन कर रहा है।

Email Account Spying

बहुत-सी ईमेल सेवाएँ ऐसी कोई सुविधा नहीं देती हैं लेकिन गूगल जीमेल (Google Gmail) में ऐसा विकल्प है जिसके ज़रिए आप पता कर सकते हैं कि कब, कहाँ और किस आइपी एड्रेस (IP Address) से आपके जीमेल खाते में लॉगिन किया। यदि आप कोई अनैतिक गतिविधि (Suspicious Activities) देखते हैं तो तुरंत ही अपने ईमेल खाते का पासवर्ड तुरंत बदल दीजिए।

आइए जाने कि -

कैसे आप अपने ईमेल खाते में हो रही अनैतिक गतिविधि की जाँच कर सकते हैं


1 - सबसे पहले जीमेल खाते में लॉगिन कीजिए

2 - यदि आप स्टैंडर्ड व्यू में नहीं हैं तो उसे सक्षम कीजिए (वैकल्पिक)

3 - अब इनबॉक्स में नीचे दायीं ओर आपको "Details" का लिंक दिखेगा। इस पर क्लिक कीजिए।

Gmail last account activity

4 - खुलने वाले पॉपअप बॉक्स में आप सम्बंधित जानकारियाँ देख सकते हैं।

Gmail activity on this account


आशा करता हूँ कि यह लेख आपके लिए उपयोगी साबित होगा।

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हिंदी ब्लॉगिंग और ब्लॉगरों को प्रोत्साहन देते हुए गूगल ने कई प्रयास किए हैं। उसने हिंदी ब्लॉगरों की विभिन्न प्रकार से सहायता की है जिससे वे सार्थक ब्लॉगिंग करते हुए इंटरनेट पर अच्छी हिंदी सामग्री प्रकाशित कर सकें और विश्व की अन्य भाषाओं की तरह हिंदी भाषा का प्रचार प्रसार कर सकें। जिससे विश्व भर में हिंदी भाषियों को अपनी आवश्यकता, सभ्यता और संस्कृति से जुड़ी समस्त जानकारियाँ इन्टरनेट के द्वारा मिल सकें।

Hangout On Air for Hindi Blogging

गूगल हिंदी ब्लॉगिंग का विकास कैसे कर रहा है?

1. सबसे पहले उसने हिंदी के सभी ब्लॉगरों को हिंदी एन्थुज़िअस्ट्स (Hindi Enthusiasts) नाम का समूह से जोड़कर उनकी समस्याएँ जानी और उन पर प्रतिक्रियाएँ दीं।
2. इसके बाद हिंदी भाषा के ब्लॉग व साइटों के ऐडसेंस की सुविधा पुन: शुरु की।
3. समस्याओं से जुड़े हैंग आउट किए और ब्लॉगिंग में आने वाली परेशानियों के हल प्रस्तुत किए।
4. गूगल क्म्यूनिटी के द्वार हिंदी एन्थुज़िअस्ट्स (Hindi Enthusiasts) नाम का समुदाय बनाया जा रहा है। जिसमें हिंदी ब्लॉगरों को जोड़कर उनके द्वारा प्रकाशित सामग्री को अन्य ब्लॉगरों तक पहुँचाया जा रहा है। साथ किए गये हैंग आउट को अन्य ब्लॉगरों तक पहुँचाया जा रहा है, जिन्हें उन्होंने नहीं देखा। साथ हैंगआउट ने उन्हें ब्लॉगिंग में कैसे मदद की इस पर सर्वे भी किया जा रहा है जिससे भविष्य में और भी अधिक सुविधाएँ प्रदान की जा सकें।

यदि आप अभी तक गूगल द्वारा की जा रही इन गतिविधियों के बारे में अवगत नहीं थे तो आपके पास है मौका देखिए गूगल द्वारा किए गये हैंग आउट्‌स जिसमें ब्लॉगिंग और एसईओ पर चर्चा की गयी और हिंदी इंथुआस्टिक समुदाय से जुड़कर भविष्य में की जाने वाले अन्य गतिविधियों के बारे में जानिए।

अब तक हुए दो हैंगआउट आगे दिए जा रहे हैं -


पहला हैंगआउट




दूसरा हैंगआउट




हैंगआउट देखकर इनके बारे में अपनी प्रतिक्रिया देना न भूलें।
https://goo.gl/7YE53i


हिंदी एन्थुज़िअस्ट्स (Hindi Enthusiasts) समुदाय से जुड़ने का लिंक -

https://plus.google.com/communities/112699546490747485856

किसी भी प्रकार की सहायता के लिए कमेंट अथवा ईमेल करें।

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तकनीक के समय में भी हम अपनी धर्म और संस्कृति से जुड़े हुए हैं और हमने तकनीक को अपने धर्म और संस्कृति से किसी न किसी रूप में जोड़ रखा है। आज हममें से अधिकांश लोग स्मार्टफ़ोन का प्रयोग कर रहे हैं और इसका प्रयोग करना भी चाहिए क्योंकि यह पुराने मोबाइल अपेक्षा अनेक बातों में कहीं अधिक अच्छा है।

अंग्रेजी कैलेण्डर के बारे में हम सब कुछ जानते हैं लेकिन हिंदी पंचांग के बारे में हमें अपेक्षाकृत कम ज्ञान है। इसलिए हमें हिंदी पंचांग बाज़ार से ख़रीदना पड़ता है। एंड्रॉयड फ़ोन प्रयोग करने वालों के लिए अच्छा समाचार यह है कि वे हिंदी पंचांग को अपने फ़ोन में इंस्टाल करके कभी भी कहीं भी प्रयोग कर सकते हैं। अपने साथ अपने कई मित्रों की हिंदी तिथियों और पर्वों की सही सही जानकारी दे सकते हैं।

Hindi Panchang Android Apps

हमने एंड्रॉयड मार्केट आपके लिए पाँच सबसे अच्छे हिंदी पंचांग जाँचें तो आपके लिए अत्यंत लाभकारी साबित हो सकते हैं। ये इस प्रकार हैं -

1. सनातन पंचांग हिंदी 2015
2. काल दर्पण हिंदी पंचांग 2015
3. श्री पंचांगम हिंदी कैलेण्डर 2015
4. हिंदू कैलेण्डर - द्रिक पंचांग
5. हिंदू कैलेण्डर


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जब भी सर्च इंजन ऑप्टिमाइज़ेशन (Search Engine Optimization) की बात आती हैं कुछ सामान्य शब्दों जैसे नोइंडेक्स, इंडेक्स, नोफ़ॉलो, डूफ़ॉलो, मेटा रोबॉट टैग्स आदि (Noindex, Index, Nofollow, Dofollow etc.) की चर्चा होती हैं। एस.ई.ओ. की दृष्टि से सभी शब्द महत्वपूर्ण हैं। इस लेख में हम सिर्फ़ नोफ़ॉलो और डूफ़ॉलो पर बात करने जा रहे हैं। आज भी बहुत से हिंदी ब्लॉगर एस.ई.ओ. में नोफ़ॉलो और डूफ़ॉलो शब्दों के बारे में कोई जानकारी नहीं रखते हैं। यह लेख विशेषकर नये ब्लॉगर्स के लिए बहुत काम का रहेगा।

Dofollow vs Nofollow Links

नोफ़ॉलो एक एचटीएमएल एट्रीब्यूट (HTML Attribute) या मेटा टैग (Meta Tag) है जो कि सर्च इंजन के बॉट्स (Search Engine Bots) को यह निर्देश देती हैं कि सर्च इंजन में उस नोफ़ॉलो मार्क किये गये लिंक की रैंक पर अच्छा या बुरा किसी प्रकार का प्रभाव न डाला जाए। नोफ़ॉलो का उद्देश्य होता है कि सर्च इंजन में अच्छे लिंक्स को अधिक ऊपर स्थान मिले जिससे स्पैम लिंक्स की रैंक न बढ़े। इसलिए ब्लॉगर या वर्डप्रेस ब्लॉग्स में कमेंट्स में डाले जाने वाले लिंक्स पर डिफ़ाल्ट वैल्यू नोफ़ॉलो ही सेट रहती है।

What is a Nofollow links?

नोफ़ॉलो लिंक क्या है?
किसी हाइपर लिंक पर नोफ़ॉलो एचटीएमएल एट्रीब्यूट लगा देने से सर्च इंजन बॉट उसके लिए कोई प्रतिक्रिया नहीं करते हैं। जिसका अर्थ है कि यदि वेबसाइट का मालिक नोफ़ॉलो का प्रयोग करके आपको लिंक जूस पास नहीं करता है। नोफ़ॉलो एट्रीब्यूट वाले लिंक्स सिर्फ़ मानव पाठकों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि वे उस पर क्लिक करके उन पर जा सकते हैं और वहाँ दी गयी जानकारी को पढ़ सकते हैं। गूगल पहले ही यह बात साफ़ कह चुका है कि नोफ़ॉलो एट्रीब्यूट वाले लिंक्स अगर कम महत्वपूर्ण हैं तो इसका ये अर्थ नहीं है कि उनका कुछ भी महत्व नहीं है। यानि हाइ ट्रैफ़िक वेबसाइट से मिलने वाले नोफ़ॉलो लिंक्स भी काम के साबित होते हैं। सामान्य रूप से हम नोफ़ॉलो लिंक्स तब बनाते हैं जब हम उस हाइपर लिंक के साथ लिंक जूस देना नहीं चाहते है।

नोफ़ॉलो लिंक का उदाहरण -
<a href="http://www.google.co.in/" rel="nofollow">Google India</a> 

What is a Dofollow links?

डूफ़ॉलो लिंक क्या है?
डूफ़ॉलो लिंक्स गूगल, बिंग आदि सभी सर्च इंजन बॉट्स को फ़ॉलो करके उन्हें उस पेज पर पहुँचने देता है जिसका वह लिंक होता है। इसका सीधा अर्थ है कि आप उस लिंक के साथ लिंक जूस शेअर कर रहे होते हैं। डूफ़ॉलो लिंक्स को बॉट्स और मानव पाठक दोनों एक्सेस कर सकते हैं। डूफ़ॉलो लिंक्स प्राय: टारगेट कीवर्ड्स के साथ प्रयोग करने से सर्च इंजन रैंक बढ़ती हैं।

डूफ़ॉलो लिंक का उदाहरण -
<a href="http://www.google.co.in/" >Google India</a> 

ध्यान देने योग्य बात है कि किसी हाइपर लिंक को डूफ़ॉलो एट्रीब्यूट देने की कोई आवश्यकता नहीं होती है। सभी साधारण लिंक्स स्वयं में डूफ़ॉलो लिंक्स होते हैं।

महत्वपूर्ण -

गूगल टीम कहती है कि किसी लेख की शुरुआत में दिये गये नोफ़ॉलो लिंक पोस्ट के अंत में दिये गये नोफ़ॉलो लिंक के अपेक्षा बेहतर है और आपकी सर्च रैंक के लिए एक अच्छी बात होगी।

पाठकों के लिए ज़रूरी टिप्स -

यदि आप अपने ब्लॉग में एफ़िलिएट लिंक्स दे रहे हैं तो उन पर नोफ़ॉलो एट्रीब्यूट ज़रूर लगायें। कम रैंक वाली साइट के लिंक जब पोस्ट में देने ही पड़े तो उन्हें नोफ़ॉलो कर दें। इससे आपकी साइट की सर्च इंजन रैंक नहीं घटेगी।

यदि अभी भी मन में कोई प्रश्न शेष हो तो कमेंट अवश्य कीजिए।

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Vinay Prajapati

{picture#https://lh4.googleusercontent.com/-vUgjWI7F7XA/U4Ybmvuz21I/AAAAAAAAO88/rQDkwEhZq84/s400-no/profile_pics.png} एक प्रोफ़ेशनल ब्लॉगर जो सभी के साथ ब्लॉगिंग का ज्ञान बाँटता है और अपने ग्राहकों के लिए वेबसाइट और ब्लॉग भी डिज़ाइन करता है। ब्लॉगिंग और ब्लॉग डिज़ाइन में 7 वर्षों से भी अधिक समय का अनुभव है। {facebook#https://www.facebook.com/vpnazar} {twitter#https://twitter.com/vinayprajapati} {google#https://plus.com/+vinayprajapati} {pinterest#https://www.pinterest.com/vinayprajapati} {youtube#https://www.youtube.com/c/techprevue} {instagram#https://instagram.com/vinayprajapati}
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